क्रिकेट की हिंदी संदर्भ-गाइड
क्रिकेट सीखें: बुनियाद से अभ्यास तक
चार मुख्य कौशलों के जरूरी विषय, तकनीक के संकेत, आम गलतियां और मैदान पर आज़माने योग्य अभ्यास पढ़ें। अपनी उम्र, अनुभव और स्थानीय नियमों के अनुसार कोच की सलाह लें।
7 विषय
बल्लेबाज़ी
गेंद को पढ़ने, संतुलन बनाए रखने और सही शॉट चुनने की बुनियाद से शुरुआत करें।
कोचिंग का मूल सिद्धांत: बड़ा शॉट बाद में; पहले गेंद की लाइन, लंबाई और अपना संतुलन पढ़ें। गेंद को देर तक देखने से शॉट का फैसला साफ़ होता है।
01ग्रिप और तैयार स्थिति
बल्ले को आराम से पकड़ें; ऊपर वाला हाथ दिशा और नीचे वाला हाथ नियंत्रण में मदद करे। पैरों को सहज दूरी पर रखें, घुटने हल्के मोड़ें और सिर स्थिर रखें।
- कंधे ढीले रखें और बल्ले का चेहरा सीधा रखें।
- आंखें गेंदबाज़ के हाथ और रिलीज़ पर टिकाएं।
- हर गेंद से पहले एक जैसी तैयार स्थिति अपनाएं।
कोच की नज़र: ग्रिप इतनी हल्की रखें कि कलाई घूम सके; गेंद लगने के बाद ही पकड़ अपने-आप मजबूत होनी चाहिए।
अभ्यास: बिना गेंद के 10 बार तैयार स्थिति लें, फिर साथी की धीमी अंडरआर्म फीड पर डिफेंस खेलें।
इस विषय के वीडियो →02फुटवर्क और गेंद की लंबाई पढ़ना
रिलीज़ के बाद पहले गेंद की लाइन और फिर उसकी लंबाई पहचानें। पैर गेंद तक पहुंचने का साधन हैं; बल्ला शरीर के संतुलन के बाद आता है।
- फुल गेंद पर आगे बढ़ें; छोटी गेंद पर पीछे जगह बनाएं।
- सिर को गेंद की लाइन में और वजन संतुलित रखें।
- बहुत दूर की गेंद पर शरीर खींचकर शॉट न खेलें।
कोच की नज़र: पहला कदम गेंद की लंबाई के जवाब में हो, पहले से तय चाल नहीं; सिर स्थिर रहे तो देर से फैसला करना आसान होता है।
अभ्यास: साथी अलग-अलग लंबाई की नरम गेंदें डाले; शॉट से पहले लंबाई को जोर से बोलकर पहचानें।
इस विषय के वीडियो →03डिफेंस और सीधे बल्ले के ड्राइव
डिफेंस विकेट बचाता है और स्ट्रेट ड्राइव फुल गेंद को सीधी दिशा में खेलता है। दोनों में सिर स्थिर, बल्ला गेंद की लाइन में और संपर्क शरीर के सामने होना चाहिए।
- फुल गेंद पर अगला पैर गेंद की पिच की ओर रखें।
- बल्ले का चेहरा सीधा रखें और शुरुआत में गेंद जमीन पर खेलें।
- अच्छी गेंद को छोड़ना भी शॉट चयन का हिस्सा है।
कोच की नज़र: डिफेंस में बल्ले की गति कम और हाथ नरम रखें; गेंद को रोकना है, उसे जोर से वापस मारना नहीं।
अभ्यास: तीन जगहों पर लक्ष्य रखें और हर लक्ष्य पर नरम गेंद से 10 नियंत्रित डिफेंस या ड्राइव खेलें।
इस विषय के वीडियो →04कवर ड्राइव, पंच और कट
ऑफ-साइड के शॉट गेंद की चौड़ाई और लंबाई के अनुसार बदलते हैं। फुल गेंद पर ड्राइव, गुड लेंथ पर पंच और शरीर से दूर छोटी गेंद पर कट उपयोगी हो सकता है।
- गेंद शरीर के पास हो तो कट के लिए हाथों को जगह दें।
- कवर ड्राइव में सिर आगे और बल्ला गेंद के पीछे रखें।
- गैप में जमीन पर खेलना ताकत से मारने से अधिक सुरक्षित है।
कोच की नज़र: कट तभी खेलें जब गेंद शरीर से दूर हो; कलाई मोड़कर पास की गेंद काटने की कोशिश अक्सर किनारा बनाती है।
अभ्यास: पॉइंट, कवर और मिड-ऑफ में कोन रखें; गेंद की लंबाई के अनुसार सही लक्ष्य चुनें।
इस विषय के वीडियो →05फ्लिक, पुल और हुक
लेग-साइड शॉट में शरीर का संतुलन और गेंद की ऊंचाई अहम है। फ्लिक पैरों की ओर आती गेंद के लिए है; पुल या हुक केवल नियंत्रित अभ्यास और उपयुक्त गेंद पर करें।
- कलाई से दिशा दें, हाथों से गेंद को जबरन न खींचें।
- पुल के लिए गेंद शरीर के सामने और नियंत्रित ऊंचाई पर हो।
- तेज़ या सिर की ऊंचाई वाली गेंद पर बचाव करना सही विकल्प हो सकता है।
कोच की नज़र: शॉर्ट गेंद पर पहले तय करें: खेलना, झुकना या छोड़ना। सुरक्षित रूप से गेंद छोड़ पाना भी बल्लेबाज़ी का कौशल है।
अभ्यास: पहले टेनिस बॉल से धीमी फीडिंग लें; हेलमेट और उपयुक्त सुरक्षा उपकरण के बिना तेज़ गेंद का अभ्यास न करें।
इस विषय के वीडियो →06स्वीप और स्पिन के विरुद्ध खेल
स्पिन के सामने आगे बढ़कर गेंद की पिच तक पहुंचें या संतुलित स्वीप खेलें। गेंद को देर तक देखें और शरीर को गेंद की लाइन में रखें।
- पैर को पिच की ओर ले जाकर गेंद की लंबाई कम करें।
- स्वीप में घुटना मोड़ें और सिर गेंद के ऊपर रखें।
- रिवर्स स्वीप जैसी जोखिम वाली विविधता पहले मूल शॉट पर नियंत्रण के बाद सीखें।
कोच की नज़र: स्वीप का फैसला गेंद की लंबाई देखकर करें; हर स्पिनर के खिलाफ पहले से स्वीप तय करना आसान कैच दे सकता है।
अभ्यास: धीमी स्पिन फीडिंग पर आगे डिफेंस, स्वीप और गेंद छोड़ने के विकल्प बारी-बारी चुनें।
इस विषय के वीडियो →07दौड़, कॉल और स्ट्राइक रोटेशन
रन लेने में दोनों बल्लेबाज़ों की साफ़ कॉल और शुरुआती तेजी जरूरी है। गेंद खेलते ही देखें कि गैप खुला है या नहीं, फिर साथी की कॉल का जवाब दें।
- ‘हाँ’, ‘नहीं’ या ‘रुको’ जैसी स्पष्ट और एक जैसी कॉल रखें।
- पहला कदम तेजी से लें और रन पूरा करते समय बल्ला जमीन पर रखें।
- फील्डर के हाथ में गेंद हो तो जोखिम का पुनर्मूल्यांकन करें।
कोच की नज़र: कॉल गेंद खेलते ही दें, आधी पिच पर पहुंचकर नहीं; एक स्पष्ट ‘नहीं’ दो हिचकिचाते कदमों से बेहतर है।
अभ्यास: दो बल्लेबाज़ और एक फील्डर के साथ 10 गेंदों पर कॉल, पहला कदम और रन पूरा करने का अभ्यास करें।
इस विषय के वीडियो →7 विषय
गेंदबाज़ी
गति या टर्न से पहले दोहराने योग्य एक्शन, लाइन-लेंथ और गेंद पर नियंत्रण बनाएं।
कोचिंग का मूल सिद्धांत: बल्लेबाज़ को आउट करने की योजना बनाएं: कौन-सा शॉट उससे करवाना है, किस जगह गलती की गुंजाइश है, और फील्ड उसका साथ कैसे देगी।
01ग्रिप, रन-अप और रिलीज़
आरामदायक ग्रिप और नियमित रन-अप गेंदबाज़ी की शुरुआत हैं। रिलीज़ के समय कलाई और शरीर का संतुलन गेंद की दिशा को प्रभावित करते हैं।
- गेंद को इतना कसकर न पकड़ें कि उंगलियां सहजता से काम न करें।
- रन-अप की लंबाई और गति ऐसी रखें जिसे हर गेंद दोहराया जा सके।
- पहले लक्ष्य पर नियंत्रण बनाएं; गति धीरे-धीरे बढ़ाएं।
कोच की नज़र: रन-अप का निशान और आखिरी कुछ कदम स्थिर रखें; लय बदलकर अतिरिक्त गति खोजने से पहले रिलीज़ की दिशा सुधारें।
अभ्यास: कम दूरी से छह गेंद एक बड़े सुरक्षित लक्ष्य क्षेत्र में डालें; हर ओवर के बाद रन-अप की लय जांचें।
इस विषय के वीडियो →02एक्शन, संतुलन और सुरक्षित कार्यभार
गेंद छोड़ते समय शरीर का संतुलन बनाए रखें और अभ्यास का भार धीरे बढ़ाएं। तेज़ गेंदबाज़ी शरीर पर अधिक दबाव डालती है; दर्द को अनदेखा करके गेंदबाज़ी जारी न रखें।
- सामने वाला हाथ लक्ष्य की दिशा में रखें और शरीर को नियंत्रित रखें।
- वार्म-अप के बाद ही तेज़ गेंदबाज़ी करें।
- उम्र और अनुभव के अनुसार ओवरों की सीमा के लिए कोच/स्थानीय दिशा-निर्देश मानें।
कोच की नज़र: एक्शन की नकल किसी तेज़ गेंदबाज़ से न करें; शरीर की बनावट अलग होती है। दर्द, लैंडिंग और दोहराव पर योग्य कोच से नजर रखवाएं।
अभ्यास: कोच की निगरानी में बिना पूरी गति के रन-अप, संतुलित लैंडिंग और फॉलो-थ्रू दोहराएं।
इस विषय के वीडियो →03लाइन, लेंथ और गेंदबाज़ी की योजना
अच्छी गेंदबाज़ी अक्सर एक ही उपयोगी क्षेत्र में लगातार गेंद डालने से शुरू होती है। लाइन लक्ष्य बताती है; लेंथ बताती है कि गेंद बल्लेबाज़ के पास कहां उछलेगी।
- स्टंप और ऑफ-स्टंप के पास सुरक्षित लक्ष्य चुनें।
- बल्लेबाज़ की ताकत के अनुसार फील्ड और लाइन तय करें।
- एक खराब गेंद के बाद भी अगली गेंद के लक्ष्य पर लौटें।
कोच की नज़र: एक ‘अच्छी लेंथ’ हर पिच पर एक जैसी नहीं दिखती; बल्लेबाज़ तक पहुंचने से पहले गेंद कहां उछलेगी, उसी को लक्ष्य बनाएं।
अभ्यास: पिच पर तीन लंबाई वाले निशान रखें और हर गेंद से पहले चुनी हुई लेंथ बताकर उसी पर निशाना लगाएं।
इस विषय के वीडियो →04सीम और स्विंग
सीम की स्थिति, कलाई की दिशा, गेंद की दशा और हवा स्विंग या सीम मूवमेंट में भूमिका निभा सकते हैं। परिणाम परिस्थितियों पर निर्भर है; एक जैसी रिलीज़ सबसे पहले सीखें।
- सीम को चुनी दिशा में स्थिर रखने का अभ्यास करें।
- गेंद को चमकाने के लिए केवल नियमों में अनुमत तरीका अपनाएं।
- पिच और हवा के अनुसार लाइन-लेंथ में छोटे बदलाव करें।
कोच की नज़र: स्विंग का दावा करने से पहले सीम और कलाई की स्थिति का वीडियो या कोच से निरीक्षण करें; रिलीज़ में छोटा बदलाव भी दिशा बदलता है।
अभ्यास: हल्की गति से एक ही रन-अप और कलाई की स्थिति में छह गेंद डालें; लक्ष्य से विचलन नोट करें।
इस विषय के वीडियो →05यॉर्कर, धीमी गेंद और शॉर्ट-पिच गेंद
विविधता तभी उपयोगी है जब सामान्य गेंद पर नियंत्रण हो। प्रतियोगिता के नियम शॉर्ट-पिच गेंदों और अन्य गेंदबाज़ी पर सीमाएं लगा सकते हैं।
- यॉर्कर के लिए पहले बड़ा ब्लॉकहोल लक्ष्य चुनें।
- धीमी गेंद में चोट से बचने के लिए हाथ या कंधे पर अतिरिक्त जोर न डालें।
- हर मैच में लागू नियम और बल्लेबाज़ की सुरक्षा प्राथमिक रखें।
कोच की नज़र: विविधता का काम बल्लेबाज़ का समय बिगाड़ना है; एक जैसी तैयारी और गेंद छोड़ने की क्रिया रखें, वरना बदलाव हाथ से पहले दिख जाएगा।
अभ्यास: टेनिस बॉल से स्थिर लक्ष्य पर यॉर्कर की दिशा का अभ्यास करें; तेज़ गति और बाउंसर प्रशिक्षित कोच के बिना न आज़माएं।
इस विषय के वीडियो →06ऑफ-स्पिन, लेग-स्पिन और उड़ान
स्पिन में उंगलियों या कलाई की क्रिया गेंद को घुमाती है; फ्लाइट और लेंथ बल्लेबाज़ को आगे आने या बचाव करने पर मजबूर कर सकती है।
- पहले आरामदायक ग्रिप और दोहराने योग्य रिलीज़ सीखें।
- टर्न से पहले स्टंप के पास लगातार सुरक्षित लेंथ डालें।
- कलाई की कठिन विविधताएं कोच के मार्गदर्शन में धीरे सीखें।
कोच की नज़र: हर गेंद को ज्यादा घुमाने की कोशिश न करें; एक ही action से flight, pace और length बदलकर बल्लेबाज़ से गलती करवाएं।
अभ्यास: धीमी गति से छह गेंद एक सुरक्षित क्षेत्र में डालें और टर्न के साथ-साथ लाइन-लेंथ की सटीकता भी दर्ज करें।
इस विषय के वीडियो →07स्पेल, फील्ड और बल्लेबाज़ को पढ़ना
गेंदबाज़ी योजना में बल्लेबाज़ की ताकत, रन गति, पिच और उपलब्ध फील्डर शामिल होते हैं। हर गेंद पर विकेट लेने की कोशिश के बजाय दबाव बनाने वाली योजना बनाएं।
- फील्डर आपकी चुनी लाइन और लेंथ को समर्थन दें।
- बल्लेबाज़ के गैप और पसंदीदा शॉट पहचानें।
- थकान या दर्द महसूस होने पर कप्तान/कोच को बताएं।
कोच की नज़र: ओवर को छह अलग-अलग जादुई गेंदों की तरह न सोचें; दोहराई गई योजना और फील्ड का तालमेल ही दबाव बनाता है।
अभ्यास: छह गेंदों का एक काल्पनिक ओवर बनाएं: लक्ष्य, फील्ड और हर गेंद की योजना पहले लिखें।
इस विषय के वीडियो →6 विषय
विकेटकीपिंग
स्टंप के पीछे की स्थिति, गेंद की लाइन में फुटवर्क और सुरक्षित हाथ विकेटकीपिंग की बुनियाद हैं।
कोचिंग का मूल सिद्धांत: कीपर का पहला काम गेंद को पढ़ना है, उसे पकड़ने के लिए पहले से गिर पड़ना नहीं। गेंद की रफ्तार, उछाल और दूरी के साथ अपनी स्थिति बदलें।
01तैयार स्थिति और स्टांस
गेंदबाज़ की गति और बल्लेबाज़ से दूरी के अनुसार स्टांस बदलता है। घुटने मोड़े हुए, वजन पंजों पर और हाथ आराम से सामने तैयार रखें।
- शरीर को संतुलित रखें ताकि दोनों ओर चल सकें।
- हाथों को गेंद की लाइन में ले जाएं, शरीर से बहुत दूर न फैलाएं।
- तेज़ गेंदबाज़ के पीछे खड़े होने की दूरी को सुरक्षित रखें।
कोच की नज़र: ‘एक perfect stance’ सबके लिए नहीं होता; गेंदबाज़ की गति, पिच और बल्लेबाज़ की क्रीज़ से अपनी दूरी समायोजित करें।
अभ्यास: बिना गेंद के विकेट के पीछे तैयार स्थिति लेकर साथी की दिशा बदलने वाली आवाज़ पर छोटे कदम लें।
इस विषय के वीडियो →02तेज़ गेंद पर मूवमेंट और कैच
तेज़ गेंदबाज़ के पीछे पहले गेंद की दिशा पढ़ें, फिर छोटे नियंत्रित कदमों से लाइन में आएं। गेंद को हाथों में नरमी से लें और आंखें संपर्क तक गेंद पर रखें।
- गेंद के उछाल के अनुसार हाथों की ऊंचाई बदलें।
- उंगलियों को गेंद की दिशा में रखें और हाथों को थोड़ा पीछे आने दें।
- किनारा लगने की स्थिति में शरीर और सिर को गेंद की लाइन में सुरक्षित रखें।
कोच की नज़र: गेंदबाज़ के हाथ से गेंद छूटते ही झुककर चलना शुरू न करें; गेंद को पढ़ने के लिए तैयार रहें और उछाल के बाद प्रतिक्रिया दें।
अभ्यास: सॉफ्ट बॉल से अलग-अलग ऊंचाई पर कैच लें; गति या उछाल बढ़ाने से पहले तकनीक स्थिर करें।
इस विषय के वीडियो →03स्पिन पर स्टंप के पास कीपिंग
स्पिन गेंदबाज़ के साथ अक्सर स्टंप के पास खड़ा होना पड़ता है। गेंद के उछाल और टर्न को पढ़कर शरीर को गेंद के पीछे रखें; हर गेंद पर अनुमान न लगाएं।
- रिलीज़ के बाद गेंद को देखें और उछाल तक स्थिर रहें।
- बगल में जाती गेंद पर पैरों से चलें, केवल हाथ न फैलाएं।
- पैड और दस्तानों सहित उपयुक्त सुरक्षा उपकरण पहनें।
कोच की नज़र: स्पिन पर दस्ताने ही नहीं, पैरों की position भी गेंद रोकती है; नीचे रहें और शरीर को संभावित miss के पीछे रखें।
अभ्यास: धीमी अंडरआर्म फीडिंग से दोनों ओर एक कदम लेकर गेंद रोकने और कैच करने का अभ्यास करें।
इस विषय के वीडियो →04गेंद इकट्ठा करना और बाई रोकना
गेंद चूकने पर भी शरीर उसके पीछे होना चाहिए ताकि वह बाउंड्री तक न जाए। बाई रोकने के लिए गेंद की लाइन में जाएं और जमीन के पास हाथ व शरीर तैयार रखें।
- नीची गेंद पर उंगलियां नीचे और हथेलियां सामने रखें।
- गेंद को रोकने के बाद पहले नियंत्रण पाएं, फिर थ्रो करें।
- वाइड या बाई का निर्णय अंपायर करता है; अभ्यास नियमों के अनुसार करें।
कोच की नज़र:
अभ्यास: साथी को दोनों ओर रोलिंग गेंदें डालने दें; हर बार गेंद रोककर वापस नियंत्रित रोल करें।
इस विषय के वीडियो →05स्टंपिंग और रन-आउट
स्टंपिंग में गेंद को साफ़ इकट्ठा करके बेल्स हटानी होती हैं, जबकि रन-आउट में गेंद और स्टंप तक पहुंचने की गति मायने रखती है। नियंत्रण और नियमों के अनुरूप क्रम जरूरी है।
- पहले गेंद पर नियंत्रण करें; जल्दबाज़ी में हाथ स्टंप की ओर न फेंकें।
- बेल्स हटाते समय गेंद दस्ताने या गेंद वाले हाथ में होनी चाहिए।
- क्रीज़ और लागू खेल नियम को समझकर ही अपील करें।
कोच की नज़र: तेज़ी का रहस्य जल्दबाज़ी नहीं, छोटा रास्ता है: गेंद को शरीर के सामने इकट्ठा करें और हाथ को सीधे बेल्स तक ले जाएं।
अभ्यास: धीमी गेंद से साथी के संकेत पर गेंद इकट्ठा करके स्टंप की ओर नियंत्रित टच का अभ्यास करें।
इस विषय के वीडियो →06कम्युनिकेशन, फील्ड और अभ्यास
विकेटकीपर गेंद की दिशा, बल्लेबाज़ों की स्थिति और पीछे के क्षेत्र को देख सकता है। साफ़ कॉल और कप्तान से तालमेल टीम को रन-आउट और कैच के मौके बनाने में मदद करता है।
- बल्लेबाज़ों के रन और गेंदबाज़ की योजना पर स्पष्ट कॉल दें।
- थकान में स्टांस ढीला पड़ता है; छोटे सेट और विश्राम रखें।
- दस्ताने और पैड सही फिट हों और मैदान की स्थिति जांचें।
कोच की नज़र: हर गेंद से पहले field और बल्लेबाज़ों की स्थिति दोबारा देखें; अगली गेंद पर सूचना देने का मौका उसी पल मिलता है।
अभ्यास: 10 गेंदों के सेट में कैच, रोक, कॉल और स्टंपिंग मूवमेंट को मिलाएं; हर सेट के बाद विराम लें।
इस विषय के वीडियो →6 विषय
फील्डिंग
तैयार स्थिति, गेंद के रास्ते का अनुमान, सुरक्षित कैच और सटीक थ्रो हर फील्डर के काम आते हैं।
कोचिंग का मूल सिद्धांत: अच्छी फील्डिंग का secret सिर्फ तेज़ दौड़ना नहीं: पहले संकेत पढ़ें, पहला कदम सही लें, फिर गेंद को सुरक्षित तरीके से वापस खेल में लाएं।
01तैयार स्थिति और पहला कदम
गेंद छूटने से पहले हल्की तैयार स्थिति लें ताकि किसी भी दिशा में पहला कदम जल्दी और संतुलित हो। गेंद की ताकत और बल्ले के कोण से संभावित दिशा पढ़ें।
- पैरों के बीच संतुलन रखें और वजन आगे रखें।
- गेंद लगते ही पहले कदम से दिशा बनाएं; एड़ी पर जमे न रहें।
- फील्डिंग पोज़िशन और कप्तान की योजना पहले समझें।
कोच की नज़र: बल्ले का face, गेंद की line और बल्लेबाज़ का balance दिशा के शुरुआती संकेत हैं; गेंद निकलने से पहले हल्का split-step तैयार रखता है।
अभ्यास: साथी अलग दिशाओं में इशारा करे; गेंद के बिना भी पहले कदम और शरीर का रुख बदलें।
इस विषय के वीडियो →02ग्राउंड फील्डिंग और गेंद रोकना
गेंद की लाइन में पहुंचें, घुटने मोड़ें और शरीर को गेंद के पीछे रखें। इससे हाथ से निकलने पर भी गेंद आगे नहीं भागती।
- नीची गेंद पर उंगलियां नीचे और दोनों हाथ पास रखें।
- गेंद को शरीर के सामने सुरक्षित रूप से इकट्ठा करें।
- पिकअप के बाद संतुलन लेकर ही थ्रो करें।
कोच की नज़र: गेंद शरीर से दूर जा रही हो तो पहले उसे रोकने का रास्ता काटें; सुंदर तरीके से गेंद उठाने से ज्यादा जरूरी एक रन बचाना है।
अभ्यास: दोनों ओर रोल की गई नरम गेंद रोकें, उसे साफ़ उठाएं और साथी को वापस दें।
इस विषय के वीडियो →03ऊंचे, छाती-ऊंचाई और क्लोज़ कैच
कैच की तकनीक गेंद की ऊंचाई और गति के अनुसार बदलती है। गेंद को लगातार देखें, उसके नीचे संतुलित होकर पहुंचें और हाथों को गेंद के वेग के साथ नरम रखें।
- सिर से ऊपर गेंद पर उंगलियां ऊपर रखें; नीचे आती गेंद पर हाथ नीचे रखें।
- कठिन कैच के लिए सुरक्षित कदमों से गेंद के नीचे पहुंचें।
- साथी से दूरी और आसपास के खिलाड़ियों की कॉल का सम्मान करें।
कोच की नज़र: कैच लेते समय हाथों को गेंद के पीछे रास्ता दें; कसी हुई हथेलियां उछाल बढ़ाती हैं, नरम हाथ गति सोखते हैं।
अभ्यास: नरम गेंद से 10 आसान कैच लें; फिर दिशा या ऊंचाई में केवल एक बदलाव जोड़ें।
इस विषय के वीडियो →04थ्रो, रिले और रन-आउट
पहले गेंद को साफ़ उठाएं, शरीर को लक्ष्य की ओर घुमाएं और नियंत्रण के साथ थ्रो करें। लंबा थ्रो हमेशा सबसे अच्छा नहीं होता; सही साथी तक तेज़ रिले अधिक उपयोगी हो सकती है।
- थ्रो से पहले लक्ष्य देखें और साथी की कॉल सुनें।
- कंधे को अचानक जोर देकर न फेंकें; दूरी धीरे बढ़ाएं।
- रन-आउट पर गेंद को स्टंप के पास साथी तक सुरक्षित पहुंचाएं।
कोच की नज़र: पहले गेंद उठाने की दिशा ऐसी रखें कि अगला कदम निशाने की ओर हो; इससे बेवजह घुमाव घटता है और थ्रो जल्दी होता है।
अभ्यास: करीबी लक्ष्य से शुरू करें और सटीकता बनी रहने पर दूरी बढ़ाएं; दर्द महसूस हो तो रुकें।
इस विषय के वीडियो →05बैक-अप, कॉल और टीमवर्क
थ्रो के पीछे बैक-अप लेने से ओवरथ्रो पर अतिरिक्त रन रुकते हैं। कैच के लिए जाते समय भी खिलाड़ियों की कॉल टक्कर से बचाती है।
- हर थ्रो के पीछे खाली जगह को कवर करें।
- ‘मेरा’ या ‘तुम्हारा’ जैसी साफ़ कॉल पहले से तय करें।
- गलती के बाद अगली गेंद के लिए तुरंत तैयार स्थिति में लौटें।
कोच की नज़र: बैक-अप गेंद फेंके जाने के बाद नहीं, पहले तय होता है: हर खिलाड़ी को पता होना चाहिए कि miss या overthrow पर कौन पीछे है।
अभ्यास: तीन खिलाड़ियों में रोल: फील्डर गेंद उठाए, साथी थ्रो पकड़े और तीसरा बैक-अप की जगह ले।
इस विषय के वीडियो →06पोज़िशन, कोण और बाउंड्री सुरक्षा
फील्डिंग पोज़िशन गेंदबाज़ की योजना, बल्लेबाज़ के शॉट और मैच के प्रारूप से तय होती है। बाउंड्री पर गेंद रोकते समय शरीर का संतुलन और मैदान की सीमा का ज्ञान जरूरी है।
- बल्लेबाज़ के मजबूत शॉट और खुले गैप पहचानें।
- बाउंड्री के पास गेंद पकड़ने से पहले पैर और रस्सी की दूरी जांचें।
- कैच या थ्रो के समय साथी की स्थिति पर ध्यान दें।
कोच की नज़र: पोज़िशन सिर्फ खड़े होने की जगह नहीं; बल्लेबाज़ की ताकत, गेंदबाज़ की योजना और boundary की दिशा मिलाकर कोण चुनें।
अभ्यास: मैदान पर अलग पोज़िशन रखें; साथी शॉट दिशा बोले और हर फील्डर सुरक्षित कोण पर पहुंचे।
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